लघुकथा

चबूतरा

“ऑफिसर , यह नोटिस आपने भेजा है !”
“जी , कोई शक !”
“क्यों भेजा ?”
“यह तीसरा व आखिरी नोटिस है ,जो यह सूचित करता है कि आप अपनी बिना लाइसेंस लिए बनाई
गई शराब की फैक्ट्री को , जो सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी है – को कल दोपहर तक बंद
करवा कर तुडवा दें !”
“यदि ना तुडवाऊँ तो ?”
“तो कल दोपहर 12 बजे के बाद , उस पर बुल्डोजर चलवा दिया जायेगा !”
“ऑफिसर ,काम अपना भी चलता रहे और आपका भी | इसीलिए कल आपको अटैची भर कर पत्रं पुष्पं
भिजवाए थे | पर आपने वापिस कर दिए | यदि कम थे , तो बताते और भिजवा देते !”
“माफ़ कीजिये यह चबूतरा बिकाऊ नहीं है !”
“ऑफिसर , जो चबूतरा हम खरीद नहीं पाते ,उसे अपने रास्ते से हटवा देते हैं !”
“ठीक है , तो कोशिश कर के देख लो ! पर कल दोपहर 12 बजे से पहले तक –वरना —!”

— विष्णु सक्सेना

विष्णु सक्सेना

पिता - स्व ;महाशय विशम्बर दयाल माता -स्व ;श्रीमती कौशिल्या देवी जन्म -26 जनवरी 1941 ,दिल्ली शिक्षा -,डी एम् ई आनर्स रूडकी विश्वविद्यालय 1964 सम्प्रति -सेवा निवृत डिप्टी चीफ इंजिनियर एच एम् टी पिंजोर ; अब स्वतंत्र लेखन ; राज्य श्रेष्ठ कृति -बैंजनी हवाओं में [काव्य संग्रह ] भाषा विभाग हरियाणा द्वारा [1972] ;अक्षर हो पुरुस्कार तुम [खंड काव्य ] हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा 2014 ; पुरुस्कृत कहानियाँ -वापसी [1996] ,चमक आत्म सम्मान की [1997] ,मुक्ति एक बोन्जाई की [1999] तीनो कहानियां हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरुस्कृत लघु शोध प्रबंध -विष्णु सक्सेना –व्यक्तित्व व कृतित्व [1998] कुसुम लता द्वारा :कहानीकार विष्णु सक्सेना [2004] अनीता नयन द्वारा : अक्षर हो तुम में मानव मूल्य [2017] कृषण चंदर द्वारा ; सभी कुरुषेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा से एम् फिल के लिए स्वीकृत सम्मान -राष्ट्रीय हिंदी सहस्त्राब्दी सम्मान [2000] मानव संसाधन मंत्रालय नई दिल्ली : व अन्य सम्पादन -कलादीप [लघु पत्रिका ]1973 से 1975 तक :चित्रांश उदगार [एकता अंक ]सितम्बर 1997 मौलिक कृतियाँ -काव्य संग्रह –बैंजनी हवाओं में 1976, गुलाब कारखानों में बनते हैं 1995,धूप में बैठी लड़की 2010 .सिरहन सांसों की 2013 :खंड काव्य –अक्षर हो तुम 2013 ,सुनो राधिके सुनो 2021 : कहानी संग्रह _बड़े भाई 1995 ,वापसी 2003 : लघु कथा संग्रह _एक कतरा सच 2018 सम्पर्क -एस जे 41 , शास्त्री नगर ,गाज़ियाबाद 201002 उ प्र : मो - 9896888017 ई मेल -vishnusaxena26@yahoo.com