चबूतरा
“ऑफिसर , यह नोटिस आपने भेजा है !”
“जी , कोई शक !”
“क्यों भेजा ?”
“यह तीसरा व आखिरी नोटिस है ,जो यह सूचित करता है कि आप अपनी बिना लाइसेंस लिए बनाई
गई शराब की फैक्ट्री को , जो सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी है – को कल दोपहर तक बंद
करवा कर तुडवा दें !”
“यदि ना तुडवाऊँ तो ?”
“तो कल दोपहर 12 बजे के बाद , उस पर बुल्डोजर चलवा दिया जायेगा !”
“ऑफिसर ,काम अपना भी चलता रहे और आपका भी | इसीलिए कल आपको अटैची भर कर पत्रं पुष्पं
भिजवाए थे | पर आपने वापिस कर दिए | यदि कम थे , तो बताते और भिजवा देते !”
“माफ़ कीजिये यह चबूतरा बिकाऊ नहीं है !”
“ऑफिसर , जो चबूतरा हम खरीद नहीं पाते ,उसे अपने रास्ते से हटवा देते हैं !”
“ठीक है , तो कोशिश कर के देख लो ! पर कल दोपहर 12 बजे से पहले तक –वरना —!”
— विष्णु सक्सेना
