अंधकार की लज्जा
तमी की तमस में अंतर्निहित चीत्कार कई
मानवता पर सवाल उठाते पुकार कई
हैवानियत को अंजाम देते दुराचार कई
रूह कंपा देनेवाली बलात्कार कई
रिश्तों को तार – तार करते तलवार कई
समाज की बेड़ियों में जकड़े वफादार कई
बेगुनाहों के घर उजाड़ते बेशुमार कई
संकोच से मुंह ढांपते लाचार कई
क्रूरता सहते आंसुओं के धार कई
न्याय की उम्मीद में जीते इंतजार कई।
— ख्यालती टंडन
