कविता

शिक्षक जीवन की बगिया का माली है

प्रथम शिक्षक मात पिता होते हैं,
दूसरा शिक्षक अक्षर ज्ञान करायें,
शिक्षक ही जीवन को सुंदर बनाएं,
शिक्षक इस जीवन में खुशियां लाए।

बच्चे गीली मिट्टी जैसे होते हैं,
शिक्षक ही बच्चे को आकार देते हैं,
शिक्षक ही”अ” से अक्षर बोध कराते ,
“ज्ञ” से ज्ञानी शिक्षक ही बनाते।

शिक्षक ही ब्रह्मा, विष्णु महेश है,
तिमिर घोर निराशा को मिटाएं,
शिक्षक आशा की किरण बिखराते है,
शिक्षक एक अनमोल रत्न होता है।

शिक्षक हमारी जीवन बगिया का माली है,
शिक्षक ही झूठ सच में भेद बताते है,
शिक्षक शिष्य के लिए मर मिट जाते हैं,
शिक्षक इस जीवन को धन्य बनाते हैं।

शिक्षक जीवन में ज्ञान दिलाते हैं,
शिक्षक ही शिष्य का भविष्य संवारते हैं,
शिक्षक अच्छे बुरे का बोध कराते हैं,
शिक्षक इस जीवन को अमृत बनाते हैं।

— कालिका प्रसाद सेमवाल

कालिका प्रसाद सेमवाल

प्रवक्ता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, रतूडा़, रुद्रप्रयाग ( उत्तराखण्ड) पिन 246171