कविता – वो वक्त, जो साथ बिताया था
मेरी उदास जिंदगी में
तेरा आगमन,
कितनी खुशियां,
और कितनी उमंगे लाया था,
याद है मुझे वो वक्त,
जो हमने साथ बिताया था।
मेरी इच्छाओं को,
पंख दिए तूने,
तेरे प्यार ने मेरे हर ज़ख्म को भराया था,
याद है मुझे वो वक्त,
जो हमने साथ बिताया था।
कितनी सारी बातें होती थी करने को,
कितना सारा प्यार होता था लुटाने को,
वो एक रुहानी समां था,
जो हम दोनों पर छाया था।
याद है मुझे वो वक्त,
जो हमने साथ बिताया था।
कितना अटूट रिश्ता था हमारा,
प्रेम की कशिश का सावन
उमड़कर आया था,
हर वक्त एक- दूजे में खोये रहते,
एक-दूजे में ही हमारा,
संसार समाया था।
याद है मुझे वो वक्त,
जो हमने साथ बिताया था।
आज जब सब कुछ पीछे छूट गया,
आज जब हमारा सफर अलग है,
मंजिलें अलग हैं,
याद वो दिन भी है,
जब मुझे देख तूने,
सिर झुका, आंखों को चुराया था,
कितनी आसानी से भुला दिया तुमने,
वो वक्त जो हमने साथ बिताया था।
— अंकिता जैन अवनी
