जय गंगा मैया
नमन करे भागीरथी,तुझे झुका कर शीश |
तेरे तट पर आ गये, पाने शुभ आशीष ||
पावन गंगा ने दिया,अपना आशीर्वाद |
मधुर स्वरो में गा रहीं,लहरें अनहदनाद ||
अन्त समय मंदाकिनी,माफ करे अपराध |
मोक्ष दायिनी बह रही , निर्विरोध, निर्बाध ||
करती है गंगा सदा,लोगो का कल्याण |
ये भारत की आत्मा,ये भारत के प्राण ||
सुन कर मन हर्षित हुआ,लहरों का संगीत |
जलचर भी गाते दिखे,मल्लाहों के गीत ||
— शालिनी शर्मा
