देशभक्ति की ज्वाला और भारत के वीर सपूतों का प्रण
भारत माता के वीर सपूतों की वीरता, त्याग और बलिदान की गाथाएं देशभक्ति की ऐसी प्रेरणा हैं जो हर भारतीय के हृदय में मां भारती के प्रति अपार प्रेम और श्रद्धा की भावना जगाती हैं। ये वे महापुरुष हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए देश को आज़ाद कराने के लिए अदम्य साहस और अटूट संकल्प दिखाया।
सबसे पहले बात करते हैं चंद्रशेखर आजाद की, जिन्हें आज़ाद नाम से जाना जाता है। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के नायक थे, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ कई महत्वपूर्ण क्रांतियां छेड़ीं। अपनी युवावस्था से ही वे अंग्रेजों से लोहा लेते रहे। इलाहाबाद में आखिरी मुकाबले में, जब वे घिरे हुए थे, तब उन्होंने कहा था “मैं आज़ाद हूँ, आज़ाद ही रहूँगा,” अंग्रेजों के हाथ कभी नहीं आए। उनकी यह शहादत भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
भगत सिंह भी ऐसे महानायक थे जिन्होंने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों से युवाओं में आज़ादी की भावना को अभिव्यक्त किया। उन्होंने सजा-ए-मौत की परवाह किए बिना अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे से देश को प्रेरित किया। उन्होंने ब्रिटिश संसद में बम फेंकने का साहस किया ताकि सरकार को चेताया जा सके कि भारत को दबाया नहीं जा सकता। 23 मार्च 1931 को उनकी फांसी ने पूरे देश को झकझोर दिया।
अशफाक उल्ला खां काकोरी कांड के प्रमुख क्रांतिकारियों में थे। उन्होंने रामप्रसाद बिस्मिल, राजगुरु के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूटने की योजना बनाई, ताकि देश के स्वतंत्रता संग्राम के लिए धन जुटाया जा सके। अशफाक उल्ला खां ने अपनी ज़िन्दगी बहादुरी से जी ,और 1927 में उन्हें फांसी दी गई। वे मुसलमान क्रांतिकारी थे जिन्होंने धर्म को दरकिनार कर देश की आज़ादी को सर्वोपरि माना, जिसका बलिदान हर किसी के लिए प्रेरणा है।
इन तीनों के अतिरिक्त, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के कई अन्य महानायक भी हैं जिन्होंने आज़ादी का दीप जलाया। रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी की रक्षा के लिए अंग्रेजों से अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी। सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फौज का गठन कर युद्ध के मैदान में क्रांति की ज्वाला भड़की। महात्मा गांधी ने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से करोड़ों भारतीयों को आज़ादी का मार्ग दिखाया। सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की राजनीतिक एकता के लिए जीवन समर्पित किया। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव जैसे कई और भी क्रांतिकारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना स्वतंत्रता संग्राम को आगे बढ़ाया।
यह वीरांगनायें और वीर सपूत हमारी मातृभूमि को स्वतंत्र और गौरवशाली बनाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर हमें गर्व की भावना सिखाते हैं। उनका त्याग हमें सिखाता है कि देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में प्रकट होनी चाहिए। हमें उनकी कुर्बानियों को याद रखते हुए, अपने देश के प्रति समर्पित और जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए।
भारत माता के इन अमर सपूतों की लड़ाई और बलिदान की कहानी हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति की लहर दौड़ाती रहे यही सच्चा सम्मान होगा। उनकी जयंती और शहादत दिवस मनाकर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम भी उनके बलिदान को सार्थक करते हुए अपनी मातृभूमि की सेवा में निरंतर तत्पर रहेंगे। जय हिन्द! जय भारत माता!
— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह सहज़
