संस्मरण

मेरे संघर्ष की कहानी

गुरुजनों की शिक्षा, परिवार का प्रेम और साथ,
जीवन यात्रा में जब संघर्षों की बात आती है, तो गुरुजन और परिवार का साथ वह अनमोल धरोहर बन जाता है, जिसकी छाया में हर चुनौती आसान लगती है। मेरे जीवन के हर मोड़ पर — स्कूल, कॉलेज, या नौकरी जहां कहीं भी कठिनाइयाँ आईं, वहां मेरे गुरुजनों की शिक्षाएँ और अपनों का साथ मेरी शक्ति बनी रही।
गुरुजन का मार्दर्शन, प्रेरणा की अखंड ज्योति
मेरे शिक्षक और मार्गदर्शक,”सह पाठी” और अन्य गुरुजन ,मेरे जीवन के पथ-प्रदर्शक रहे हैं। उनकी दी हुई शिक्षाएँ आज भी मेरी स्मृतियों में उतनी ही ताजा हैं। उन्होंने सिर्फ किताबों की बात नहीं सिखाई, बल्कि जीवन के मूल्य: दृढ़ निश्चय, ईमानदारी और मानवता का पाठ पढ़ाया। कठिन परिस्थितियों में जब कभी मैं डगमगाया, तो उनके शब्द मुझे फिर से संभाल गए। वह अनुशासन, श्रम और आत्म-विश्वास जो उन्होंने मेरे भीतर बोया, आज भी हर उपलब्धि की नींव है।
माँ-पिता का प्यार,अटूट सहारा
मेरे माता-पिता का बिना शर्त स्नेह और विश्वास सबसे बड़ा सहारा रहे। आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के बावजूद उनका समर्पण और सकारात्मक दृष्टिकोण मेरी ऊर्जा बने। जब कभी मैं असफल हुआ या थक गया, तो माँ के प्यारभरे शब्द और पिता की सलाह ने मुझे फिर से आगे बढ़ने का साहस दिया।
भाई-बहनों का साथ,साझेदारी का अद्भुत संबंध,
परिवार के हर सदस्य का स्नेह, भाई-बहनों के साथ बिताया बचपन, साझा संघर्ष, ये यादें मेरी आत्मा में रच-बस गई हैं। कभी छोटे-छोटे झगड़े, तो कभी एक-दूसरे के लिए सपनों का साथ बन जाना, उन पलों को भुलाया नहीं जा सकता। हम सबने साझा जीवन-संघर्ष से बहुत कुछ सीखा, मिलजुलकर हर कठिनाई को पार किया।
जीवन की सच्ची विरासत,
आज जब भी अतीत के पन्ने पलटता हूँ, तो महसूस करता हूँ ,गुरुजनों की शिक्षा, परिवार का प्रेम और साथ, यही मेरी असली दौलत हैं। संघर्षों की राह में यह धरोहर मेरी ताकत बनी, मेरी सोच को दिशा दी और हर मुश्किल में उम्मीद की किरण बनी।
परिवार और गुरुजनों से मिली सीख और प्रेम के बिना मंज़िल अधूरी है। जीवन की सबसे गहरी जड़ें वहीं हैं,और यही मेरी सबसे अनमोल विरासत है।
मेरी कामयाबी के हर कदम के पीछे, इन सभी की प्रेरणा, आशीर्वाद और साथ सदा मौजूद है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता, बल्कि हृदय में हमेशा अमिट बना रहेगा।

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।