भारत भूमि पर सुर में गीत
मेरे प्यारे भारत देश में रंग प्रेम के भरे जाते हैं
भारत भूमि पर सुर में गीत गुनगुनाए जाते हैं।
वीरांगनाओं की जौहर की गाथाएं हों या उत्सव
अवसर के अनुसार गीतों के होते सुर-सरगम,
बरसात न हो रही तो यहाँ दीपक राग गाए जाते हैं।
सोने की चिड़िया भारत में दूध की नदियां बहती थीं,
विश्व गुरु ये देश रहा ग्रंथों की कहानियां कहती थीं,
वेद-पुराणों के ज्ञान-विज्ञान जग में सराहे जाते हैं।
यहाँ गंगा-यमुना-सरस्वती त्रिवेणी-संगम होता है,
यहाँ अनेकता में एकता का अद्भुत संयम होता है,
मिट्टी में समाई सभ्यताओं में संस्कार पाए जाते हैं।
उत्तर में हिमालय-सा प्रहरी भारत का संरक्षण करता है,
दक्षिण में सागर भारत मां के चरण-प्रक्षालन करता है,
छः ऋतुओं के सुरम्य नजारे भारत में ही पाए जाते हैं।
यह संत-महंतों-गुरुओं का पावन देश कहाता है,
बड़ी शान से झंडा तिरंगा यहाँ लहराता-फहराता है,
हर दिन यहाँ खुशियों से भरे त्योहार मनाए जाते हैं,
भारत भूमि पर सुर में गीत गुनगुनाए जाते हैं।
— लीला तिवानी
