गीत/नवगीत

भारत भूमि पर सुर में गीत

मेरे प्यारे भारत देश में रंग प्रेम के भरे जाते हैं
भारत भूमि पर सुर में गीत गुनगुनाए जाते हैं।

वीरांगनाओं की जौहर की गाथाएं हों या उत्सव
अवसर के अनुसार गीतों के होते सुर-सरगम,
बरसात न हो रही तो यहाँ दीपक राग गाए जाते हैं।

सोने की चिड़िया भारत में दूध की नदियां बहती थीं,
विश्व गुरु ये देश रहा ग्रंथों की कहानियां कहती थीं,
वेद-पुराणों के ज्ञान-विज्ञान जग में सराहे जाते हैं।

यहाँ गंगा-यमुना-सरस्वती त्रिवेणी-संगम होता है,
यहाँ अनेकता में एकता का अद्भुत संयम होता है,
मिट्टी में समाई सभ्यताओं में संस्कार पाए जाते हैं।

उत्तर में हिमालय-सा प्रहरी भारत का संरक्षण करता है,
दक्षिण में सागर भारत मां के चरण-प्रक्षालन करता है,
छः ऋतुओं के सुरम्य नजारे भारत में ही पाए जाते हैं।

यह संत-महंतों-गुरुओं का पावन देश कहाता है,
बड़ी शान से झंडा तिरंगा यहाँ लहराता-फहराता है,
हर दिन यहाँ खुशियों से भरे त्योहार मनाए जाते हैं,
भारत भूमि पर सुर में गीत गुनगुनाए जाते हैं।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244