कविता

कसम हमें है इस मिट्टी की

कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हम को प्यार।
पला बड़ा हूॅं इस मिट्टी में, कर दूं जान निसार।
कूद पड़े थे आजादी को, थे इतने अरमान।
लहू बहा कर इसे बचाया, शहीद हुए जवान।
झूम उठा था देश हमारा, बोल हिंद जयकार।
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हमको प्यार।
रक्षा सरहद की करने को, बैठे हम तैयार।
इस मिट्टी की खातिर हम, देंगे जीवन वार।
आंख उठा कर मैली देखे, देंगे दुश्मन मार।
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हम को प्यार।
ऋषि मुनियों की है धरती, पावन है यह धाम।
जन्म लिया श्री भगवन नें, खेलें मोहन राम।
मन को भाती ऋतुएं न्यारी, मनमोहनी बहार।
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हम को प्यार।
नाम बना है विश्व पटल पर, अपना भारत देश।
चूम रहा है शिखर गगन का, बदल रहा परिवेश।
वीरों ने है दी आजादी, जीवन का उपहार।
कसम हमें है इस मिट्टी की, इस से हम को प्यार।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995