गीत/नवगीतपद्य साहित्य

जीवन साथी नहीं है कोई

कुछ खुद को कह रहे घराती, कुछ कहते हैं, बराती हैं।

जीवन साथी नहीं है कोई, सब कुछ पल के साथी हैं।।

मात-पिता संग बचपन जीया।

किशोरावस्था में, मन का कीया।

युवावस्था का, धोखा मधुर था,

गले लगा, जीवन रस पीया।

कुछ ही पल तक साथ चलें ये, बातें इनकी भरमाती हैं।

जीवन साथी नहीं है कोई, सब कुछ पल के साथी हैं।।

काया ही जीवन की साथी।

मच्छर हो या फिर हो हाथी।

देखभाल काया की कर लो,

यह ही आथी, जीवन-साथी।

काया बिना, आत्मा भी भूत है, दुनिया जिससे शरमाती है।

जीवन साथी नहीं है कोई, सब कुछ पल के साथी हैं।।

मात-पिता का साथ है सीमित।

पति-पत्नी संग, नहीं असीमित।

जीवन साथी नहीं मिलेगा,

साथ किसी का नहीं है बीमित।

काया जब तक, जीवन तब तक, शेष सभी वश भाथी हैं।

जीवन साथी नहीं है कोई, सब कुछ पल के साथी हैं।।

सहायताः- आथी-संपत्ति, भाथी-धौंकनी।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)