कविता

ढूँढ लेना मुझे तन्हाई में

कहीं अपनी ही परछाई में,
हाँ ! ढूँढ लेना मुझे तन्हाई में

वक्त मिले जब सपनों से,
मिलना चाहो अपनों से,
भले दूर सही तुम से कहीं,
जब कोई तुम्हें रुसवाई दे,
ढूँढ लेना मुझे तन्हाई में।

हरदम संग अपने पाओगे,
चाहे कितनी ही दूर जाओगे,
चाहिए कुछ नहीं तुमसे हमें,
कभी सुनो कहीं शहनाई ये,
ढूँढ लेना मुझे तन्हाई में।

ख्वाब न कोई ख्वाहिश नहीं,
ज़िन्दगी से कोई शिकायत नहीं,
पर मुस्कुराहट होंठों पे छाई ये,
याद आऊं जो दिल की गहराई में,
कभी भी ढूँढ लेना मुझे तन्हाई में।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |