गीतिका/ग़ज़ल

गजल

दर्द को गम गुसार कौन करे।
जिंदगी में शुमार कौन करे।
क्या करूं मांगकर किसी से भी
मुफलिसी में उधार कौन करे।
हासिले इश्क इक फसाना है
और दिल सोगवार कौन करे।
शायरी में बयां नहीं हो तो
जज्ब इतने गुबार कौन करे।
जब हंसाती तभी रुलाती है
याद पे एतबार कौन करे।
जो न समझा यकीन के मानी
जान उस पर निसार कौन करे।
इश्क की उम्र एक लम्हा है
उम्र भर इंतजार कौन करे।

— हेमंत सिंह कुशवाह

हेमंत सिंह कुशवाह

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