मेरी साइकिल
पापा ने साइकिल दिलवाई, चलने की मुझे रीत सिखाई,
जन-चेतना जगाऊंगा अब, इसमें ही है सबकी भलाई।
रंग बिरंगी साइकिल मेरी, मित्रों को भी भाती है,
कहते इसकी टन-टन घंटी, बीन बजाती आती है!
परिवहन-साधन के रूप में, साइकिल को अपनाओ प्यारे,
सस्ती-सुलभ-सरल है साइकिल, भूल न जाना इसको प्यारे।
साइकिल चलाओ, सेहत सुधारो, पर्यावरण को स्वच्छ बनाओ,
ईंधन का उपयोग नहीं है, प्रदूषण मुक्त है सबको बताओ।
स्वच्छ इंडिया, क्लीन इंडिया, साइकिल से संभव होगा,
वायु भी जब शुद्ध रहेगी, भला हमारा भी तब होगा।
— लीला तिवानी
