कविता

कविता

आँसुओं के रूप में
मेरे दुःख को
दूर कर दो।
आँसुओं की ठंडक से
मेरे मन को फिर से सांत्वना दो।
जो खो गया है,
उसे मिले हुए में छुपा दो।
मुझे सहते हुए
आगे बढ़ने की शक्ति दो।

— एस. अमन्दा सरत्चन्द्र

एस. अमन्दा सरत्चन्द्र

श्री लंका