लघुकथा- ट्यूशन
ट्यूशन से लौटकर आया हुआ रोहित घर में घुसते ही दादा जी से टकरा गया। दादा जी ने उसे रोककर पूछा- “आज क्या पढ़ा?”
“गणित!” रोहित ने संक्षिप्त उत्तर देकर वहाँ से भागना चाहा। परन्तु दादा जी ने उसे नहीं भागने दिया, “दिखाओ मुझे कैसे सवाल किये हैं!”
विवश होकर रोहित ने अपनी कॉपी निकाली और उस दिन जो सवाल किये थे वे खोलकर दिखाये।
दादा जी ने देखा कि सवाल तो सही किये थे, परन्तु इससे यह पता नहीं चलता कि सवाल उसकी समझ में कितना आये हैं। इसलिए उन्होंने उससे एक मिलता-जुलता प्रश्न पूछ लिया।
प्रश्न सुनकर रोहित चकरा गया। दादा जी समझ गये कि रोहित की समझ में कुछ नहीं आया है। इसलिए उन्होंने कहा- “ट्यूटर तुम्हें अच्छी तरह नहीं समझाता। इसलिए कल से तुम मेरे साथ बैठकर गणित पढ़ा करो।”
रोहित ने प्रसन्नता से स्वीकार कर लिया।
— डॉ. विजय कुमार सिंघल
