कविता

एक फूल खिला

एक फूल खिला सूर्य देव को देखने के लिए,
सुगंध के साथ और भी
सुंदरता लेकर।
उस फूल के चारों ओर
मधुमक्खियाँ मंडराती रहीं,
पर कुछ ही दिनों में
वह फूल मुरझा गया।
क्या वह फूल ही नहीं था
जिसने अपनी सुगंध दी?
क्या उसी फूल ने यूँ ही
कष्ट भी सहा?
मुरझाए हुए फूल से
पूछो सच्चाई,
वह कैसे मुरझा गया — थोड़े ही समय में।

— अमन्दा सरत्चन्द्र

एस. अमन्दा सरत्चन्द्र

श्री लंका