गीत नया गाता हूं
टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरुणिमा की रेखदेख पाता हूं,
गीत नया गाता हूं,गीत नया गाता हूं।
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अंतर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं,
गीत नया गाता हूं,गीत नया गाता हूं।
— हेमंत सिंह कुशवाह
