कविता

शिक्षक महान

नहीं जीवन है रुक-रुक कर जीना
मँजिल जब हो अंधेरों में गुमशुदा
तमस हृदय में ज्ञान दीप जगाए
सत्य पथ दिखाए गुरु महान !
ए शिक्षक महान प्रणाम तुम्हें !

कस्तूरी मृग सा हो जब बेखबर
विचरता मन बस इधर-उधर
भीतर बसती महक रूहानी से
रूबरू करवाए गुरु देव !
ए गुरु महान प्रणाम तुम्हें !

माटी काया को स्वर्णिम बनाए
आशीष तेरे से गतिशीलता सम्भव
जीवन लफ्ज़ का भेद सुलझाए
भव-सागर पार कराए गुरु महान !
ए गुरुदेव महान सलाम तुम्हें !

बेजान बदन पर पंख लगाए
भरोसा नभ पर उड़ने का
अधूरे जीवन में सार्थकता का
दिव्य बोध करवाए गुरु महान !
ए शिक्षा दाता प्रणाम तुम्हें !

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com