कविता

मुस्कुराहट

आपके तथाकथित भगवान को
आपने सिर्फ फोटो में दिखाया मुस्कुराते,
मगर हमने देखा है अपने महापुरुषों को
मुस्कुराते,हाथ ऊपर उठा लहराते,
जिन्होंने सारी उम्र खपा दिया
हमें ऊपर उठाने में,सक्षम बनाने में,
और आपने जोर लगाया हमें आजमाने में,
हमने देखा है बुद्ध की मुस्कान,
की आपने अपने देश में मिटाने की कोशिश
मगर सारा जहां कर रहा उसे प्रणाम,
कबीर साहेब ने तत्कालीन व्यवस्था हिलाया था,
पाखंड में फंसे लोगों को नींद से जगाया था,
अपने तर्कों से रैदास ने बदलाव कर दिया,
लोगों में सोचने का भाव भर दिया,
राष्ट्रपिता ज्योतिबा ने बताया कि
सत्य राह अपनाओ कर्मों का न लगाओ हिसाब,
किसी भी भगवान ने नहीं लिखा कोई किताब,
गुरू घासीदास जी कहा
मानव मानव एक समान,
सत्य ही मानव का आभूषण है
इसे ही सब कुछ जान,
जल,जंगल,जमीन से प्रेम क्या होता है
बिरसा मुंडा जी हमें बताया,
दिलों में बस धरती आबा कहलाया,
भीमराव अंबेडकर जी ने जहां ही बदल डाला,
तभी अधिकारों से लैश हो खा पा रहे निवाला,
कांशीराम साहब ने राजनीतिक जागृति लाया,
दबे कुचले को भी उचित स्थान पर बिठाया,
हमारे इन सारे महापुरुषों को
हमने देखा है अपने कार्यों से,वचनों से मुस्कुराते हैं,
जिन्हें देख अनुयायी जोश में भर आते हैं,
अभी और भी बहुत उद्धारक आएंगे,
जल्द सब कुछ अपने हाथों में लाएंगे।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554