जलाओ दिया
जल रहा है एक दिया
हार नहीं मानता।
सदा है रोशनी से भरा
अँधेरे के विरोध में खड़ा।
जल रहा है एक दिया
निराशा नहीं जानता।
सदा है आशा से भरा
नकारात्मता के विरुद्ध खड़ा।
जल रहा है एक दिया
अज्ञानता नहीं जानता।
आत्म-प्रकाश से है भरा
असत्य के विरुद्ध है खड़ा।
आओ जलायें एक दिया
प्रकाश से भरा
आशा से भरा
ज्ञान से भरा
शाश्वत सत्य से भरा।
मुक्त हों भय
वैमनस्यता, राग-द्वेष का
हिंसक प्रवृति का
असत्य, मृत्यु का।
आह्वान करें
“असतो मा सद् गमय
तमसो मा ज्योतिर्गमय”
— डाॅ अनीता पंडा ‘अन्वी’
