कविता

श्रद्धांजलि जुबिन दा

छोड़ चला दुनिया को एक नायाब सितारा,
था जो सबका ही बहुत बहुत बहुत प्यारा,
संगीत की करता था वो नित भावपूर्ण साधना,
बसी थी जिसके मन में प्रेम करूणा की भावना ।

एक महान युगपुरुष कलाकार और विचारक,
अनेक प्रतिभाओं का वो प्रतिभाशाली धारक,
मॉं शारदे का था वो एक सच्चा सेवक उपासक,
रो पड़ी धरा थमीं उसकी सांसें यूॅं जब अचानक ।

जुबिन दा की कठिन मेहनत का ही था प्रताप,
अंतिम विदाई में गमगीन हो यह रूह गई कॉंप,
छोड़ चला अरबों दिलों में वो अपनी गहरी छाप,
अमर रहेगा युगों युगों तक उसका संगीत जाप ।

अपनी जमीन मिट्टी से था गहरा जुड़ा वो बंदा,
उनके जैसे “आनंद” सितारे होते हैं बस चुनिंदा,
जीवन कर सार्थक अपना उड़ चला वो परिंदा,
सभी के दिलों में रहेगें हमेशा जुबिन दा जिंदा ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु