स्पर्श
याद आती है वो छुवन,
जब बादल ने धरा को चूमा था,
लहलहा उठी थी धरती,
सिहर सी गयी थी,
जब हवाओं ने उसे छुआ था।
कहने को तो तुम दूर बहुत हो,
पर तुम्हारी यादें
हर पल मुझे छूती जाती हैं,
जैसे कोई अनदेखा स्पर्श
मन के तारों को हिलाता हो।
अंकित हृदय पर आज भी
आंखों का स्पर्श,
जब तुमने देखा था।
— सविता सिंह मीरा
