सामाजिक

रैगिंग पर अंकुश लगाना सामूहिक जिम्मेदारी है,

रैगिंग एक गंभीर और सामाजिक रूप से चिंताजनक समस्या है जो आज भी देश के अनेक शैक्षणिक संस्थानों में विद्यमान है। यह केवल मज़ाक या मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि विद्यार्थियों के जीवन और व्यक्तित्व पर गहरा और कभी-कभी स्थायी प्रभाव डालने वाली मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना है। रैगिंग के कारण नए छात्रों में गहरी दहशत और डर पैदा हो जाता है। कई बार यह डर उनके आत्मविश्वास को तोड़ देता है और वे अपने शैक्षणिक जीवन में ठीक से आगे नहीं बढ़ पाते। मानसिक प्रभाव के रूप में छात्र तनाव, चिंता, अवसाद और अकेलेपन जैसी समस्याओं का सामना करने लगते हैं, जो कभी-कभी आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने तक पहुंच जाती हैं। शारीरिक प्रभाव में बलपूर्वक कार्य कराना, शारीरिक यातना, मारपीट या अपमानजनक कार्य शामिल होते हैं जो उनके शरीर पर स्थायी नुकसान पहुँचा सकते हैं। शैक्षिक प्रभाव यह होता है कि भय और तनाव के कारण छात्र अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते और उनके प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। व्यक्तित्व के स्तर पर यह आत्मविश्वास की कमी, आत्मसम्मान का ह्रास और सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ जाने की स्थिति उत्पन्न करता है। भारत में रैगिंग को कानूनी अपराध माना गया है और इसके विरुद्ध सख्त प्रावधान बनाए गए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को रैगिंग विरोधी समितियाँ बनाने, सहायता हेल्पलाइन स्थापित करने और दोषियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक संस्थान में एंटी-रैगिंग सेल होना चाहिए और शिकायत दर्ज कराने के लिए गोपनीय व सुरक्षित माध्यम उपलब्ध कराना अनिवार्य होना चाहिए। रैगिंग करने वाले छात्रों को न केवल संस्थागत दंड मिलना चाहिए जैसे निष्कासन, जुर्माना या निलंबन बल्कि उन पर कानूनी कार्यवाही भी होनी चाहिए। रैगिंग को रोकने के लिए केवल सख्त कानून पर्याप्त नहीं हैं बल्कि शिक्षा संस्थानों को संवेदनशील और सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करना होगा। नए छात्रों का स्वागत सकारात्मक गतिविधियों से करना चाहिए ताकि उनमें आत्मीयता और अपनापन बढ़े। वरिष्ठ और कनिष्ठ छात्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियाँ आयोजित की जा सकती हैं। माता-पिता और शिक्षकों को भी सतर्क रहकर बच्चों में किसी भी व्यवहारिक परिवर्तन को गंभीरता से देखना चाहिए। रैगिंग पर अंकुश लगाना सामूहिक जिम्मेदारी है। यह केवल प्रशासन या कानून का कार्य नहीं बल्कि हर छात्र, शिक्षक और अभिभावक की नैतिक जिम्मेदारी भी है। डर और दहशत के वातावरण में शिक्षा का सच्चा उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। इसलिए आवश्यक है कि हम रैगिंग के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएँ और छात्रों को एक सुरक्षित, सहयोगपूर्ण व सम्मानजनक माहौल प्रदान करें ताकि वे आत्मविश्वास और सफलता के साथ अपने शैक्षिक और व्यक्तिगत जीवन में आगे बढ़ सकें।

— डॉ.मुश्ताक़ अहमद शाह 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।