मधुमक्खियों की तरह एक
भोर की धुंध में
सूरज की पहली किरण
उम्मीद जगाती
फूलों की गलियों
मधु संग उड़ते सभी
संगीत सा बहता
बांसुरी की धुन
पवन में मिल जाती है
सपनों की तरह
नीले अम्बर में
परिंदों की चहचहाहट
सुख के संदेश लाए
तालाब किनारे
कमल के फूल मुस्काते
जल में नाचते
सांझ की रौशनी
पेड़ों की छाँव में
सुकून मिलता है
बारिश की बूँदें
मिट्टी की खुशबू संग
जीवन को तरसाए
पहाड़ों की चोटी
हवाओं में संगीत है
शांति का अहसास
सुनहरी रौशनी
धूप की किरणों संग
नया दिन आए
वृक्षों की शाखों
पत्तों की सरसराहट
कहानियां सुनाए
चाँदनी रात में
तारों का जाल बिछा
मधुर स्वप्न लाए
प्रकृति के रंग
हर दिशा में बिखरे हैं
सुकून की बातें
फूलों के बीच में
मधुमक्खियों का नृत्य
जीवन की लय
पवन की सरसराहट
सागर की लहरों में
गीत सुनाई दे
सपनों की दुनिया
हकीकत में समा जाए
मन को भाए
हर छोटे कदम
सफर को रोशन करे
जैसे दीपक
मधुर मुस्कानें
सहजता से बिखर जाएँ
सबको अपनाए
हवाओं के संग
उड़ते पंखों की तरह
मन भी उड़े
फूलों की खुशबू
संग मधु की मिठास
संसार सजाए
दिन की रौशनी
संध्या की सुनहरी छाया
संतुलन लाए
संगीत की धुन
मन को भटका ना पाए
धैर्य बढ़ाए
प्रकृति की सीख
सहनशीलता का संदेश
जीवन बनाए
हर दिल में प्रेम
मधुमक्खियों की तरह
सदैव रहे
शांति का संदेश
सभी के जीवन में
खुशियाँ भर दे
— डॉ. अशोक, पटना
