विजयदशमी से महके कोना
कालचक्र सह असंख्य युद्ध संग्राम घटे,
सत्य की ज्योत जलाए ‘श्रीराम’ हैं डटे।
श्रीराम व रावण के बीच यह युद्ध हुआ,
अस्त्र-शस्त्र एवं छल बल से शुद्ध हुआ।
वन प्रजातियाँ युद्धभ्यास के न अनुभव,
इस युद्ध में श्रीराम ही उनके रहें वैभव।
एक ओर रहें प्रशिक्षित अनुभवी योद्धा,
दूसरी ओर वनवासियों में अद्भुत माद्दा।
प्रभु की विश्वास नय्या अनंत सागर पार,
उत्साह रूपी शस्त्र से हो जाएँ बेड़ा पार।
प्रभु की अगुवाई में जीत गई वानरसेना,
आओ मनाए विजयदशमी महके कोना।
यह समय है बड़ा अदभुत और हैं पावन,
इस धरा पर आए न जाने कितने रावण।
युगों तक मानव बुद्धि के तर्कों से निरस्त्र,
असुरी शक्तियाँ रावण-सी होती रहें पस्त।
— संजय एम तराणेकर
