एक धर्मात्मा

आज मेरे परम प्रिय मित्र और आदरणीय सहयोगी, ‘जय विजय’ पत्रिका के प्रधान संपादक, धर्म, योग, प्राकृतिक उपचार और कंप्यूटर के विशेषज्ञ, कर्मठ कार्य करता, समाज सेवक, और बैंक से सेवा निवृत्त उच्चाधिकारी —
श्री विजय सिंघल जी और मेरी दोस्ती की सालगिरह है, 14 वर्षों से वह मुझे मार्ग दर्शन दे रहे हैं।सदा उनका आभारी हूं।
ऐसे अवसर पर उन्हें प्रणाम करता हूँ —
एक धर्मात्मा
वो आस्तिक या नास्तिक ही सही ,
पर पूरा तो ईमान रखता है …
इंसानियत के नाते ,
इंसान की पहचान रखता है,
नहीं करता कोई दिखावा ,
ना ही कोई आडम्बर करता है,
पर आन पड़े ज़रुरत तो,
हर गरीब की मदद करता है,
ना तेरा मेरा ,ना छोटा न बड़ा .
सबको एक आँख से तकता है,
सब इंसान एक हैं,
कोई जात पात का,भ्रम नहीं रखता है,
ना लाउडस्पीकर लगा कर
किसी की नींद हराम करता है,
ना दिखावे के लिए ,
किसी बाबा जी के,चरणों में पड़ता है,
पर सदा सच बोलता है,
और सबसे नम्रता से मिलता है,
हाँ, कोई नास्तिक कहे या आस्तिक,
पर मुझे तो एक धर्मात्मा दिखता है,
— जय प्रकाश भाटिया
4.10.2025
