कमाई
यहां पे हर कोई आया है कमाने के लिए,
सारे जहां को ‘कमाई’ से लुभाने के लिए।
यूं जिंदगी को एक नया मोड देने के लिए,
अपनी एक नवद पहचान बनाने के लिए।
सिर्फ दौलत कमाने से काम नहीं चलता,
दिल की दौलत में ही सब कुछ है पलता।
राह चलता इंसान बहुत लेकर निकलता,
रिश्तो को जोड़ते बहुत कुछ है संभलता।
सबके हाथों का मैल है ये दिखती दौलत,
ऐश-ओ-आराम की जिंदगी मिलें तो लत।
यहां कमाना प्रेम, स्नेह, नाम एवं शोहरत,
न भूल पड़ेगी दो पल सुकून की ज़रूरत।
— संजय एम तराणेकर
