सिर्फ अपने बच्चों के लिए
सपनों का आकाश,
नन्हीं आँखों की चमक,
राहें रोशन हों।
माँ की दुआएँ,
पिता की थमी हुई छाया,
जीवन की छतरी।
पढ़ाई की लौ,
कभी न बुझे अँधेरों में,
दीपक बन जलो।
संघर्ष की राह,
सच्चाई का साथी हो,
हिम्मत सँवारो।
स्नेह की पगडंडी,
जहाँ फूल ही फूल खिलें,
मन को महकाएँ।
दुनिया के मेले में,
अपना रास्ता पहचानो,
भीड़ में न खोना।
पंख खोल देना,
उड़ो ऊँचे आसमान,
खुद पर भरोसा।
बचपन की खिलखिल,
भविष्य की नींव बने,
प्यार से सँवरे।
— डॉ. अशोक
