क्षणिका

शरद की सुप्रभात

शरद ने कानों में आकर,
कह दिया चुपके से गाकर —
“पाकर मुझको निखर गई ना?
सच कहो, तुम सिहर गई ना?”

धवल वितान नभ पर छाया,
चितवन चाँदनी-सी दमकाया।
शरद ने कानों में आकर

— सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com