दिवाली आई
चमचम करते दीप जले हैं,
खुशियाँ लेकर दिन ढले हैं।
रात अमावस की मुस्काई,
जब दीपों की पंक्ति सजाई।
फूलों की रंगोली महकी है,
हर चौखट पर रौनक देखी है।
मन में उमंग, हृदय में प्यार,
आया दीपों का अद्भुत त्यौहार।
गुंजे घर-घर मंगल गाना,
हर कोना अब लगे सुहाना।
धूप, दीया-बती और मिष्ठान,
करते सब माँ लक्ष्मी का गुणगान।
स्वागत उनका सजे थाल से,
प्रेम भरे हर एक सवाल से।
आरती में विश्वास भरा है,
हर दीप में उजास भरा है।
सोने-सा दमके हर आँगन,
छंट जाए जीवन का हर क्रंदन।
लक्ष्मी माँ पधारें हर द्वार,
भर दें कृपा से सबकी भंडार।
भक्ति से जो दीप जलाए,
सच्चे मन से उन्हें बुलाए,
माँ उसके जीवन में आती,
सुख-समृद्धि की वर्षा लाती।
आओ सब मिल दीप जलाएँ,
मन के तम को दूर भगाएँ।
दीपावली का ये उपहार,
लाए जीवन में सुख अपार।
— रूपेश कुमार
