कविता

दिवाली आई

चमचम करते दीप जले हैं,
खुशियाँ लेकर दिन ढले हैं।
रात अमावस की मुस्काई,
जब दीपों की पंक्ति सजाई।

फूलों की रंगोली महकी है,
हर चौखट पर रौनक देखी है।
मन में उमंग, हृदय में प्यार,
आया दीपों का अद्भुत त्यौहार।

गुंजे घर-घर मंगल गाना,
हर कोना अब लगे सुहाना।
धूप, दीया-बती और मिष्ठान,
करते सब माँ लक्ष्मी का गुणगान।

स्वागत उनका सजे थाल से,
प्रेम भरे हर एक सवाल से।
आरती में विश्वास भरा है,
हर दीप में उजास भरा है।

सोने-सा दमके हर आँगन,
छंट जाए जीवन का हर क्रंदन।
लक्ष्मी माँ पधारें हर द्वार,
भर दें कृपा से सबकी भंडार।

भक्ति से जो दीप जलाए,
सच्चे मन से उन्हें बुलाए,
माँ उसके जीवन में आती,
सुख-समृद्धि की वर्षा लाती।

आओ सब मिल दीप जलाएँ,
मन के तम को दूर भगाएँ।
दीपावली का ये उपहार,
लाए जीवन में सुख अपार।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com