धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

भगवान धन्वंतरी – सागर की गहराइयों से नीलवर्ण तेजस्वी रूप में प्रकट हुए

भारतीय संस्कृति के विराट आयाम में जब हम जीवन के अर्थ की खोज करते हैं तो वहाँ भगवान धन्वंतरी का नाम आदर, श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ लिया जाता है क्योंकि वे केवल आयुर्वेद के प्रवर्तक नहीं बल्कि स्वास्थ्य, संतुलन और जीवनी के ब्रह्मस्रोत हैं, समुद्र मंथन के दिव्य प्रसंग में जब देवता और दानव अमृत की खोज में संलग्न थे तब सागर की गहराइयों से वे नीलवर्ण तेजस्वी रूप में प्रकट हुए, उनके हाथों में अमृतकलश था, वह अमृत केवल दीर्घायु का प्रतीक नहीं बल्कि जीवन का सत्व, अस्तित्व का संतुलन और आत्मा की प्रसन्नता का संकेत था, भगवान धन्वंतरी ने मानवता को यह अद्भुत ज्ञान दिया कि रोग केवल शरीर का विकार नहीं बल्कि विचारों और कर्मों का असंतुलन है, उन्होंने कहा कि जब मन शुद्ध हो, आहार सात्विक हो, नींद सुचारु और कर्म करुणामय हों तभी आरोग्य संभव है, यही कारण है कि उन्हें देव वैद्य और चिकित्सकों के गुरु का सम्मान प्राप्त है, उनका प्रत्येक उपदेश केवल औषधीय उपचार तक सीमित नहीं बल्कि जीवन की प्रत्येक अवस्था के साथ जुड़ा हुआ है, उन्होंने दिखाया कि प्रकृति ही सर्वोत्तम औषधालय है और सच्चा उपचार वह है जो शरीर के साथ आत्मा को भी स्वस्थ करे, आज जब मनुष्य भौतिकता में उलझकर काल्पनिक सुखों के पीछे भाग रहा है तब उसका मन थका हुआ है, शरीर असंतुलित है और समाज तनावग्रस्त, ऐसे युग में धन्वंतरी की शिक्षाएँ केवल ग्रंथों की नहीं बल्कि व्यवहार की आवश्यकता हैं, वे हमें स्मरण कराते हैं कि औषधि वहीं सफल होती है जहाँ विश्वास जीवित रहता है, और रोगी तभी स्वस्थ होता है जब चिकित्सक के हृदय में करुणा बसती है, इस अर्थ में हर वैद्य, हर डॉक्टर और हर साधक धन्वंतरी की परंपरा का वाहक है, कार्तिक मास की त्रयोदशी जिसे धनतेरस कहा जाता है, केवल धन की अभिलाषा का पर्व नहीं बल्कि आरोग्य की साधना का उत्सव है, इस दिन स्वास्थ्य के देवता को नमन करते हुए हम यह स्वीकार करते हैं कि उनका ज्ञान, उनका विज्ञान और उनका करुणामय दृष्टिकोण ही वह अमृत है जिसकी रक्षा आज सबसे अधिक आवश्यक है, धन्वंतरी के ऋण से कोई मुक्त नहीं क्योंकि उन्होंने हमें यह सिखाया कि जीवन सबसे बड़ा उपहार है और उसका संरक्षण सबसे बड़ा धर्म, जब हम दूसरों के दुःख में भागीदारी करते हैं, जब किसी दर्द में साथ खड़े होते हैं, जब किसी रोगी की आँखों में आशा जगाते हैं, तब वही क्षण होता है जब धन्वंतरी का आशीष हम पर बरसता है, उनकी कृपा हर वैद्य की करुणा में, हर रोगी की विश्वास भरी प्रार्थना में और हर माता की स्नेहमयी दृष्टि में उपस्थित है, हम यदि अपने जीवन को संयम, सात्विकता और कृतज्ञता से जी सकें तो वही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी, क्योंकि उन्होंने हमें केवल शरीर की चिकित्सा नहीं सिखाई बल्कि आत्मा के संतुलन का मार्ग बताया, और यही मार्ग अमृत का मार्ग है, वही अमरत्व है, वही आभार का जीवन है जो प्रत्येक श्वास में भगवान धन्वंतरी की उपस्थिति को अनुभव करता है।

— डॉ. आरज़ू अहमद शाह 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।