धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

दीपावली,दीपों की लौ में दैदीप्यमान हमारा भारत,

दीपावली भारतीय संस्कृति का वह उज्ज्वल पर्व है जो केवल दीप सजाने या मिठाइयाँ बाँटने का उत्सव नहीं बल्कि आत्मिक आलोक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है यह दिन उस दिव्य स्मृति को पुनर्जीवित करता है जब प्रभु श्रीराम वनवास की अवधि पूर्ण कर अयोध्या लौटे और सम्पूर्ण नगर दीपमालाओं से आलोकित हुआ यह दृश्य केवल उत्सव नहीं था बल्कि अंधकार पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की विजय का उद्घोष था, उसी क्षण से दीपावली भारतीय जीवन में हर वर्ष लौटने वाला प्रकाशोत्सव बन गई जो हमें याद दिलाता है कि जब तक भीतर का दीप नहीं जलेगा तब तक बाहर के दीप व्यर्थ हैं यह पर्व पाँच दिनों तक मनाया जाता है,धनतेरस से भाईदूज तक चलने वाले इन दिनों में भारतीय लोकजीवन अपनी समृद्ध परंपराओं और मानवीय भावनाओं की झलक दिखाता है लक्ष्मीजी और गणेशजी की पूजा इस बात का बोध कराती है कि जीवन में धन और विवेक का संतुलन ही सच्ची समृद्धि है दीपावली हमें सिखाती है कि प्रकाश केवल दीपक में नहीं बल्कि आत्मा में खिलने वाला विश्वास है आधुनिक सभ्यता कभी उस सच्चे उजाले को नहीं बुझा सकती जो प्रेम, विश्वास और धर्म से जलता है यही वह लौ है जो युगों से भारत को पोषित करती आई है और आने वाले युगों में भी इसके गौरव को अमर रखेगी हर दीपक में आशा की झिलमिलाहट है, हर रोशनी में अपनेपन की चमक है, और हर मुस्कान में उस भारत की आत्मा झलकती है जो अपनी संस्कृति की ज्योति से सम्पूर्ण मानवता का मार्ग आलोकित करती रही है। दीपावली दरअसल रूहानी और इंसानी रौशनी का संगम है, एक ऐसा मंज़र जब दिलों की दीवारें मिट जाती हैं और मुहब्बत की लौ हर दिशा में फैल जाती है,ये हिन्दोस्तान की रूह में समाई यह दीवाली वो वक़्त है, जब हर इंसान अपने अंदर के अँधेरे को जलाकर रोशनी का पैग़ाम देता है,अहसास दिलाती है कि असली उजाला न आईनों में है न चिराग़ों में बल्कि इंसान के दिल में छिपी नेकी में है इससे वक़्त का हर ज़रिया रौशन हो उठता है खेत खलिहान रौनक से भर जाते हैं बच्चे आसमान में पटाखों की चमक के साथ सपने सजाते हैं और घरों में दीए नहीं इबादतें जलती हैं ये दीवाली दरअसल हमारी तहज़ीब की वो याद है जो सदीयों से मुहब्बत अमन और रोशनी का अलम उठाए खड़ी है और जब तक भारत की मिट्टी में ये दीए जलते रहेंगे तब तक उसकी रूह भी उजली रहेगी क्योंकि उसी उजाले में इस मुल्क की पहचान और इज़्ज़त बसती है।

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।