दोस्ती ही असली धन है
सूरज की किरणें,
हँसी में बसी मिठास,
सच्चा साथी।
संग चलें हम सब,
सारे ग़म हों दूर कहीं,
मित्रता चमके।
साँझ की हल्की हवा,
पग-धुन में गूँजती धुन,
साथ हमारा।
हाथों में हाथ लिए,
रास्ते हों सरल सभी,
सच्चे दोस्त।
सूरज ढले, छाँव आए,
हृदय में प्यार जगाए,
दोस्ती अमोल।
सुख-दुःख के हर पल,
साया बने संग हमेशा,
मित्रता बनी रहे।
कहानियों की गूँज,
हँसी में मिले हर रंग,
साथ हमारा।
हर स्मृति याद रहे,
सपनों में भी मुस्कान लाए,
दोस्ती की खुशबू।
स्नेह और विश्वास,
हर दिल में रोशनी करे,
सच्चा साथी।
सर्दी या गर्मी में,
संग बना रहे हम सब,
मित्रता अमोल।
सफ़र चाहे लंबा हो,
हाथ पकड़ संग चलें हम,
दोस्ती का धन।
हर राह हो रोशन,
सपनों में रंग भर जाए,
सच्ची मित्रता।
— डॉ. अशोक
