कविता

दीपोत्सव

दीपोत्सव कुछ इस तरह से चलो हम मनाएं,
हर घर हो दीवाली थोड़ा अपना धर्म निभाएं,
प्रभु श्री राम जी के गुणों को जीवन में उतारें,
अपने अनमोल जीवन को सद्गुणों से संवारे ।

खुशियों की फुलझड़ियॉं घर-घर टिमटिमाएं,
मिलजुल कर हम त्यौहार सोहार्द पूर्ण मनाएं,
नकारात्मक विचारों की करें तगड़ी सफाई,
मन मंदिर में आत्म “आनंद’ की हो रोशनाई ।

मुस्कुराहटों का घर-घर नव दीप करें प्रज्वलित,
प्रकृति का कण-कण हो सुवासित प्रफुल्लित,
जगमग करे अंतर्मन का जागृत दिव्य प्रकाश,
घर, परिवार, समाज और राष्ट्र का हो विकास ।

दीप्तिमान, समृद्धिवान, वैभवशाली हो जीवन,
बरसे धरती पर शुद्धता सौंदर्यता का नव यौवन,
अनार, चकरी रंग बिरंगी रोशनियों के चाव का,

करें हम नव सृजन भीतर प्रेम करूणा भाव का ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु