भैया दूज
भाई की लंबी उम्र की खातिर,
भैया दूज का ये पर्व पवित्र है।
प्यारा-सा दिल में भाव उमड़ता,
जो करता निर्मल हर मन विचार।
फर्ज़ और स्नेह का हैं संगम,
रीति–रिवाज़ों से हुआ श्रृंगार।
जज़्बातों के टीके में सजकर,
हर रिश्ते में होता निखार।
तपस्या सा ये पावन व्रत है,
जिसमें विश्वास की लौ जलती।
भाई बहन के निर्मल बंधन में,
भैया दूज हर पीड़ा को हरता।
— मुनीष भाटिया
