कविता

भैया दूज

भाई की लंबी उम्र की खातिर,
भैया दूज का ये पर्व पवित्र है।

प्यारा-सा दिल में भाव उमड़ता,
जो करता निर्मल हर मन विचार।

फर्ज़ और स्नेह का हैं संगम,
रीति–रिवाज़ों से हुआ श्रृंगार।

जज़्बातों के टीके में सजकर,
हर रिश्ते में होता निखार।

तपस्या सा ये पावन व्रत है,
जिसमें विश्वास की लौ जलती।

भाई बहन के निर्मल बंधन में,
भैया दूज हर पीड़ा को हरता।

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com