छठ माँ की आराधना
सूरज निकला सुनहरी रोशनी में,
जल में चमके उसकी निर्मल धारा।
धरती ने ओढ़ी पूजा की चादर,
हर घाट बना भक्ति का सहारा।
व्रती खड़ी है जल के भीतर,
चेहरे पर श्रद्धा की उज्जवल लहर।
मन में सच्ची आस्था जागे,
हर दिल में है भक्ति का असर।
घाटों पर गूंजे मीठे गीत,
“छठी मईया, सुख दे हर प्रीत।”
बूढ़े, बच्चे, नारी, नर सब एक,
संग भरे हैं पूजा की अनुपम रीत।
ठेकुआ की खुशबू, गन्ने की छाँव,
दीपक में जलता जीवन का भाव।
सूरज की किरणें जब जल को छूएं,
हर दिल में अनोखा उजियारा आए।
ढलते सूरज को अर्घ्य दिया,
शाम हुई तो घाट झिलमिलाया।
उगते सूरज को भी अर्घ्य दिया,
नया सवेरा सुख संदेश लाया।
यह पर्व नहीं बस उपवास का,
ये तो सच्चा प्रकृति प्यार का।
छठ हमें सिखाता है यही,
मनुष्य और प्रकृति एक ही कही।
— रूपेश कुमार
