अंतस् की भव्य-दिव्य 75वीं काव्य-गोष्ठी

“साहित्यकार समाज का पथ प्रदर्शक होता है, वह पग-पग पर समाज का मार्गदर्शन करता है।साहित्यकार युग-युग का प्रतिनिधित्व करता है, उसकी रचना केवल एक युग तक ही सीमित नहीं रहती है और श्रेष्ठ साहित्य वही होता है जो हितकारी होता है, मंगलकारी होता है, समाज में अपना श्रेष्ठ प्रभाव प्रसारित करता है यद्यपि अधिकांश केवल उसे समाजिक स्थिति का चित्रण तक सीमित रखते हैं.”
उक्त उद्गार डॉ दिनेश कुमार शर्मा, संस्थापक अध्यक्ष, हिंदी प्रचारिणी सभा, अलीगढ़ तथा अंतस् के ब्रजप्रांत प्रभारी, ने ख्यातिलब्ध साहित्यकार, गीतकार, ग़ज़लकारा डॉ पूनम माटिया के श्रेष्ठ संयोजन, संचालन एवं नियंत्रण में साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘अंतस्’ के तत्त्वावधान में दिल्ली के दिलशाद गार्डन में आयोजित 75वीं संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये।
सान्निध्य रहा प्रसिद्ध ग़ज़लकार सहायक पुलिस आयुक्त डा. आदेश त्यागी का।
श्रेष्ठ एवं प्रशंसनीय संचालन ‘अंतस्’ की संस्थापक-अध्यक्ष डॉ पूनम माटिया ने किया।
कवि संगोष्ठी का उत्तम श्री गणेश गार्गी कौशिक की सुमधुर वाणी से नि:सृत सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
कवि संगोष्ठी में ग़ज़लकार एवं गीतकार ‘अंतस्’ संस्था के महासचिव दुर्गेश अवस्थी ने अपने काव्य पाठ में सुंदर ग़ज़ल प्रस्तुत करते हुए कहा –
“मिलेगा न तुमको कोई भी कहीं पर,
ये सारे निशाने लगा दो हमीं पर”
इसी क्रम में साहिबाबाद से पधारे डॉ. ईश्वर सिंह तेवतिया ने सामयिक एवं प्रासंगिक गीत में बुजुर्गों की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा –
“मेरे घर में, मेरे संग में, मेरी तन्हाई रहती है,
या फिर जो अपनो ने दी है बस वो रुस्वाई रहती है”
डॉ ओंकार त्रिपाठी ने देश-प्रेम नव गीतों के माध्यम से अपना काव्य पाठ इस प्रकार किया-
“जाने कैसे तुमने जीवन बसर किया होगा,
कोलाहल से सन्नाटे तक सफ़र किया होगा”
लब्ध प्रतिष्ठ दोहाकार डॉ मनोज ‘कामदेव’ ने गोष्ठी को भव्य-दिव्य बताते हुए अपने दोहे प्रस्तुत करते हुए कहा-
“सूरज ने पाती लिखी, देख रात का रूप।
खिड़की खुलते ही गिरी एक लिफ़ाफ़ा धूप।।”
भगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या से आए ओजस्वी गीतकार डा.अवधेश तिवारी ‘भावुक’ ने राष्ट्रीयता से ओतप्रोत गीत प्रस्तुत करते हुए अपना काव्य पाठ इस प्रकार किया-
“जोखिम, जोश और साहस से जिसे अपना काम किया, झंझावातों, तूफ़ानों ने, ‘भावुक’ उसे प्रणाम किया।”
विश्व प्रसिद्ध गीतकार कुंअर बेचैन जी की सुपुत्री वंदना कुंअर रायज़ादा ने सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत करते हुए अपने काव्य पाठ में कहा-
“जिन द्वारों पर हमने बांधे सौ-सौ बंदनवार,
उन द्वारों पर सारे सुख हारे हैं आख़िरकार।”
कवि संगोष्ठी की आयोजक, प्रसिद्ध कवयित्री, शायरा डॉ पूनम माटिया ने अपनी ग़ज़ल प्रस्तुत करते हुए कहा-
“चंद लकीरों ने ही सारा जीवन बांच दिया,
हर रेखा में एक कहानी लिक्खी होती है।”
ग़ाज़ियाबाद से पधारे राजीव सिंहल ने अपने काव्य-पाठ में प्रेमपूर्ण ग़ज़ल प्रस्तुत करते हुए कहा-
“कैसी यह मोहब्बत है कैसे दास्तानें हैं,
इस शहर में जाने क्यों सब तेरे दीवाने हैं”
वरिष्ठ शायर डॉ आदेश त्यागी ने अपनी सामयिक रचना प्रस्तुत करते हुए कहा-
“मेरे बच्चो! गर कभी फ़ुर्सत मिले तो सोचना,
मैंने तुमको क्या दिया था, तुमने मुझको क्या दिया?”
ग़ाज़ियाबाद से आईं गार्गी कौशिक ने अपने सुमधुर कंठ से अपना काव्य पाठ कुछ इस प्रकार किया-
“चुप न रहती तो और क्या करती,
हक़ नहीं था कि मैं फ़ैसला करती”
‘अंतस्’ की उपाध्यक्ष अंशु जैन ने शब्दों की क्षमता को अपनी पंक्तियों में उकेरा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संगोष्ठी-अध्यक्ष डॉ दिनेश कुमार शर्मा, अलीगढ़ ने अपने ओजस्वी काव्य-पाठ को इस प्रकार किया-
“भारत के ज्योतित ललाट पर दाग़ न लग जाए,
अपने ही चिराग़ से घर को आग न लग जाए।।”
‘अंतस्’ के संरक्षक इंजीनियर नरेश माटिया तथा कोषाध्यक्ष निर्मल जैन ने पूरे समय उपस्थित रहकर इस काव्य- रसधारा में अवगाहन किया।
अंत में आयोजक- श्रीमती डॉ पूनम माटिया और नरेश माटिया, ने सभी आमंत्रित कवियों और श्रोताओं का सम्मान और आभार व्यक्त करते हुए रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया।
