कविता

गोपाष्टमी

कार्तिक शुक्ल पक्ष शुभ अष्टमी तिथि आई,
गोचरण को प्रथम बारी चले हैं श्री कन्हाई,
सखियॉं गावै मंगलाचार यशुमति है हर्षाई,
नंदभवन में उत्सव भयो सबन को बधाई ।

अति ही प्यारी मदनमोहन को गैया माई,
कन्हैया कहाएं गोपाल गोसेवा सुखदाई,
लीला बाल कृष्ण की धूम सकल मचाई,
गोपाषटमी तिथि शुभ समृद्धि फलदाई ।

गौ से मिले पंचगव्य सोमरस दूध मलाई,
गैया की करो रक्षा जगत माता ये कहाई,
गोसेवा है संचित कर्म बंधन मुक्ति प्रदाई,
गौसेवा से बड़ा पुण्य और दूजा नही भाई ।

पवित्र हैं गंगा गीता गायत्री गौरी गौमाई,
गिरिराज गोवर्धन गोविंद और गुंसाई,
तैतिस कोटि देव देवी एक गऊ पूजाई,
श्रद्धा भक्ति समर्पण “आनंद” उपजाई ।

गोरज तिलक भाल श्रेष्ठतम फलदाई,
गो सेवा ही जीवन की असली कमाई,
गौ को न हो कहीं कोई कष्ट कठिनाई,
संरक्षित हो गोधन जीवन की कमाई ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु