कविता

समानता की पुकार

समानता की पुकार…
अवहेलना, अपमान मत करो किसी का,
ऊॅंच-नीच, जाति-भेदभाव स्वार्थ का ताज़ा।
मनुष्य के भीतर छिपी लालसा सुख-भोग की,
असमानताऍं लायीं, बिखरें रिश्तों की धरोहर सी।

भाईचारे के इस सुंदर जग में,
धोखा, झूठ, शोषण, वंचना –
मनुष्य ने मनुष्य के साथ
करता आया है अनादि से।

वर्ण और जाति का यह भेद
ईश्वर ने नहीं, मनुष्य ने रचा।
कुटिल तंत्र, बंधे हुए मन का खेल,
अपरिपक्व चिंतन, अपराध का मेला।

अल्प, अबला मत समझो किसी को,
जग में अपना कुछ जोड़ने में वे समर्थ।
शक्तिमान हैं, यह सत्य सब जन जाने,
हर हृदय में बसी उनकी महिमा की कथा।

त्याग, समर्पण हैं सबसे बड़ी शक्तियॉं,
हथियारों से नहीं जीते जा सकते मन और हृदय।
प्रेम, अहिंसा और सेवा-यही विजय का मार्ग,
यही मानवता का अनमोल उपहार।

पी. रवींद्रनाथ

ओहदा : पाठशाला सहायक (हिंदी), शैक्षिक योग्यताएँ : एम .ए .(हिंदी,अंग्रेजी)., एम.फिल (हिंदी), सेट, पी.एच.डी. शोधार्थी एस.वी.यूनिवर्सिटी तिरूपति। कार्यस्थान। : जिला परिषत् उन्नत पाठशाला, वेंकटराजु पल्ले, चिट्वेल मंडल कड़पा जिला ,आँ.प्र.516110 प्रकाशित कृतियाँ : वेदना के शूल कविता संग्रह। विभिन्न पत्रिकाओं में दस से अधिक आलेख । प्रवृत्ति : कविता ,कहानी लिखना, तेलुगु और हिंदी में । डॉ.सर्वेपल्लि राधाकृष्णन राष्ट्रीय उत्तम अध्यापक पुरस्कार प्राप्त एवं नेशनल एक्शलेन्सी अवार्ड। वेदना के शूल कविता संग्रह के लिए सूरजपाल साहित्य सम्मान।