प्रथम आयाम जिंदगी की
पहली किरण में,
सपनों का आलोक है,
जीवन का आरंभ।
मिट्टी की गंध,
आशा का कोमल स्पर्श,
नव सृजन जागा।
पवन की सरगम,
मन के तारों को छेड़े,
संगीत बना।
बूँदों की भाषा,
धरती का सौम्य प्रणाम,
जीवन का श्वास।
कदमों की आहट,
भोर का मधुर निमंत्रण,
चलना ही जीवन।
फूलों की हँसी,
क्षणों की कोमल धड़कन,
प्रेम की गवाही।
सूरज की बाहों,
छाँव के संग लिपटी हैं,
संतुलन यही।
साँसों की लय में,
अनुभव का गान फूटा,
जीवन मुस्काया।
— डॉ. अशोक
