कविता

बेक़दरों के साथ मत रहना

अकेले हो जाने के खौफ से,
तुम खुद से जुदा मत हो जाना।
ये भीड़ बहुत शोर करती है,
मगर दिल का सन्नाटा नहीं भरती है।

जो साथ हैं, वो ज़रूरी नहीं अपने हों,
और जो अपने हैं, वो ज़रूरी नहीं पास हों।
हर मुस्कान की कीमत आँसू से न चुकाओ,
हर रिश्ते को रिश्ता समझकर न निभाओ।

कुछ लोग बस वक़्त काटने आते हैं,
तुम उम्र गँवाने मत बैठ जाना।
झूठे सुकून के नाम पर,
सच्चे दर्द को दबाना मत।

खुद से मोहब्बत ही सबसे बड़ा साहस है,
इसे किसी के रहम पर मत छोड़ो।
अगर रास्ते में कोई नहीं चलता,
तो अपने साये से बात कर लेना।

दुनिया को तमीज़ नहीं कद्र की,
तुम अपनी कीमत खुद पहचान लेना।
अकेले हो जाने के खौफ से,
तुम बेक़दरों के साथ मत रह जाना।

— डॉ प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh