मुश्किलों से जूझते हुए
धूप की धार
कंधों पर गिरती
रास्ता तपे
थका सफर
रेत से उभरती
नई उम्मीद
धुंधले कदम
कठिनाइयों में भी
चाल न टूटे
अंधेरी रात
तारों की झिलमिल
हौसला दे
कठोर पवन
सीने पर पड़कर
और मजबूत करे
टूटते पल
फिर भी भीतर से
आवाज़ उठे
बरसती चुनौतियां
भीगे मन में भी
साहस खिले
मुश्किल राहें
चलते-चलते ही
आसान हों
— डॉ. अशोक
