बाल कविता

बाल कविता

बैठ चादनी के रथ चंदा
मामा के घर जाऊँ।
आसमान से तोड़ सितारे
आँगन में‌ लटकाऊँ।।

चिडिया मुझे सिखा देवे यदि
उड़ना फुर फुर फुर फुर
घर घर जाकर रोज सुनाऊँ
चहचाहट वाले सुर।।

माली काका इतने पेड़
बने कैसे समझाओ।
रंग बिरंगे फूल कहाँ से
लाए रंग बताओ।‌।

भरता पानी कौन घटा में
बरखा कौन कराता।
कौन बदल कर इन ऋतुओं में
गर्मी सर्दी लाता।।

माँगू मैं भी पंख उसी से
तितली सी उड़ पाऊँ।
उपवन उपवन घूमूँ दिन भर
फूलों पर मँड़राऊँ।‌।

— सतीश बंसल

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.