गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

भूल जाओ तुम अनादर ही करने का तरीका।
याद रखना तुम बड़ों का मान रखने का तरीका।।

अब किसी की बात का माख़ौल ही तुम मत उड़ाना।
रख छठी का दूध अब तो याद रखने का तरीका।।

जीत बाज़ी अब हमीं ने जीतना सीखा सुनो तो।
हारने पर छोड़ दें हम आज मरने का तरीका।।

प्यार करना ही नहीं हो खेल कोई देख भी लो।
खेल भी हो तो बता दो आज ढलने का तरीका।।

बेवफ़ा बनना नहीं धोखा नहीं देना हमें अब।
जानते हम भी अभी तो, खुद बदलने का तरीका।

जीतना ही चाहता हूँ मैं किसी का दिल अभी ही।
आज तो मुझको बता दो प्यार करने का तरीका।।

आज चिलमन ही हटा कर देखने दे अक्स अपना।
जान लूँ मैं आज लोगों के फिसलने का तरीका।।

हर अदा बहकी लगे ही, साथ भी प्यारा लगे ही।
( थाम ले बाँहें सिखा दे, साथ चलने का तरीका।। )

चाँदनी रातें सलोनी देख रहती हैं लुभाती।
आज तन्हा सीख लूँ मैं दर्द कहने का तरीका।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति