बेटियां
ये किसने और कब बेटियों के लिए भ्रम फैलाया,
कि बेटियां अपनी नहीं होती ये होती हैं पराई,
बेटियां नहीं होती हैं पराई।
बेटियां हैं तो है ये सृष्टि ,
जिस घर में ये रहती हैं,
वहां माता सरस्वती और लक्ष्मी की होती है वृष्टि ।
बेटियों के होते हैं कई स्वरूप,
मां,बहन और बेटी की होती हैं ये रूप।
बेटियां होती हैं अनमोल रत्न,
जिसे पालते हैं मां बाप करके जतन।
आज बेटियां शासन, प्रशासन और सेना में संभालती हैं कमान,
देश,समाज और परिवार का बढ़ा रही हैं अभिमान।
जरूरत है बेटियों के बारे में बदलने की सोच,
जिनके दिलों दिमाग में है भ्रम का मोच।
— मृदुल शरण
