कविता

ओस की फुहार

सुबह की पहली किरण ,
धरा पर जब बिखरती है|
मन को शांत और निर्मल,
जीवन की कली खिलने लगती है|

मोती की तरह पत्तों पर चमकती,
हवा भी धीरे बातें करती है|
फूलों में खुशबू बिखरती,
नई सुबह में उमंग भरती है|

ओस की पहली फुहार,
मन में उमंग भरती है|
सुंदरता झलक जाती जग में,
सभी के जीवन को महकाती है

— पूनम गुप्ता

पूनम गुप्ता

मेरी तीन कविताये बुक में प्रकाशित हो चुकी है भोपाल मध्यप्रदेश