कविता

जन्म और मृत्यु

जन्म है सूरज-सा उगता,
मृत्यु है ढलता उजियारा,
बीच में जीवन की धुन है,
चलना-रुकना एक सहारा।

मां की गोद में पहली धड़कन,
स्वप्नों का कोमल स्पंदन,
कदम-कदम पर सीखें हम सब,
रचते अपना एक जीवन।
आशाओं के दीप जलाए,
मन में नई उमंगों की धारा।
जन्म है सूरज-सा उगता…

थकी किरण जब ढलने लगती,
तम की बाहें गहरी होतीं,
जीवन का संगीत अधूरा
धीमे-धीमे सोता-जागती।
बंधन सारे टूट गिरेंगे,
खुल जाएगा अनंत का द्वारा।
मृत्यु है ढलता उजियारा…

चलना-सिखला जाता जन्म,
रुकना-पर हार नहीं मृत्यु,
इन दो पलों के बीच ही तो
लिखते हम जीवन की सृष्टि।
कर्म, धड़कन, स्वप्न मिलाकर,
बनता छोटा-सा पुल प्यारा।
बीच में जीवन की धुन है…

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com