संभल कर रहने की ताक़ीद
अब तक किस किस ने निभाया है अपना कर्तव्य,
यदि मन-कर्म-वचन से है सच्चा तो दे अपना वक्तव्य,
एक उच्च पदाधिकारी से लेकर एक निम्न पदाधिकारी तक
अपने जेहन में लेकर घूम रहा है अपनी जाति,
इसी आधार पर प्रताड़ना इसी आधार पर ख्याति,
देश के प्रति प्रेम सिर्फ दिखावा बनकर रह गया,
होगा वही जो उच्च अपनी आवेश में आ कह गया,
अमानवीय व्यवस्था के तथाकथित निम्न वर्ग,
बताइए कब तक करेगा आपके हर कार्य पर गर्व,
यहां हर कोई अपनी सामाजिक स्थिति पर ऐंठा है,
हर जाति दूसरे से अपनी उच्चता लिए बैठा है,
निम्न के बारे में कोई नहीं सोचता कोई नहीं देखता,
बस कायराना हंसी हंस दूर से है आंखें सेंकता,
विश्व बंधुत्व की बात करने वालों
सिर्फ एक बार समता पर उतर कर देखिए,
यदि नहीं कर पाये ऐसा तो
फालतू की नैतिकता कूड़े में फेंकिए,
प्रताड़ना से तंग भला इंसाफ खातिर
कहां से व्यवस्था चश्मदीद करे,
समय ऐसा न आ जाये कि
एक दूसरे को देख संभल कर रहने की ताक़ीद करे।
— राजेन्द्र लाहिरी
