कविता

हरि नाम

ऐसा नही है कि समस्याओं से
सदैव इंसान बिखरता है
सच तो यह है कि बहुधा वह
और भी अधिक निखरता है।

मेहनत और संघर्ष के प्रति फल की
महक सदा ही आनंददायक होती
आखिर तप- तप कर ही तो
सोना आभूषण बनता है ।

खराब समय में ही इंसान को
अपनी असलियत का पता चलता है
कौन है सचमुच का हमदर्द
और कौन कन्नी काट कर निकलता है।

जब वक्त आपके अनुकूल है तब तो
हर कोई अपने आप में शहंशाह है
विपरीत परिस्थितियों में जो न टूटे
इतिहास में नाम तो, वही गढ़ता है ।

अक्सर ज्यादा सीखने का अवसर भी
कठिन क्षणों में ही मयस्सर होता
अधिकतर सुख व ऐश्वर्य पूर्ण समय
व्यर्थ के वार्तालाप में गुजरता है।

सुख -दुख है जीवन का अभिन्न अंग
उतार -चढ़ाव से ज़िन्दगी में भरता रंग
जो इसको सहज स्वीकार कर पाता
उसका भविष्य और भी संवरता है।

इतिहास ऐसी हस्तियों से भरा पड़ा है
जिन्होंने लगातार मुसीबतें झेलीं
अन्ततः सफलता भी उनके कदम चूमे
जो जल्दी से न हार स्वीकार करता है।

ईश्वर ने जो भी क्षण उपलब्ध कराए
आओ हम उसे हंसी -खुशी से बिताएं
शुद्ध मन से करते रहें प्रभु का शुक्रिया
अंत समय हरि नाम कहां निकलता है।

शुद्ध मन से करते रहें प्रभु का शुक्रिया
अंत समय हरि नाम कहां निकलता है।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई