पांच क्षणिकाएं
सुबह की हंसी
ओस में नहाया मन
खुशियां खिल उठीं
हल्की सी धूप
आंगन में फैल गई
सुकून ही सुकून
हवा का झोंका
मन से बोझ ले जाए
मुस्कान बचे
सपनों की पोटली
आज खुलकर बिखरे
रंग ही रंग
साधारण पल
दिल में उत्सव बन जाए
जीवन धन्य हुआ
— डॉ. अशोक
सुबह की हंसी
ओस में नहाया मन
खुशियां खिल उठीं
हल्की सी धूप
आंगन में फैल गई
सुकून ही सुकून
हवा का झोंका
मन से बोझ ले जाए
मुस्कान बचे
सपनों की पोटली
आज खुलकर बिखरे
रंग ही रंग
साधारण पल
दिल में उत्सव बन जाए
जीवन धन्य हुआ
— डॉ. अशोक